बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नमामि गंगे’

0
82

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे को अब मात्र दो वर्ष का समय शेष है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रोजेक्ट बिल्कुल धीमी चाल से चल रहा है. जानकारी के मुताबिक 145 स्वीकृत परियोजनाओं में से कुछ 13 ही पूरे हो पाई हैं.

जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक राज्यों ने गंगा एक्शन प्लान के तहत पिछले तीन दशकों (1985-2015) के बीच जो काम दो चरणों में देखा उससे कहीं ज्यादा तेजी से काम चल रहा है. मंत्रालय ने कहा कि अभी इस मुश्किल प्रोजेक्ट में काफी कुछ किया जाना है.

अब तक पूरी की गई परियोजनाओं के तहत नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता प्रति दिन केवल 198.13 मिलियन लीटर (एमएलडी) ही है. यह जानते हुए कि गंगा नदी के तटों के किनारे बसे शहरों से कुल 8,250 एमएलडी गंदा पानी निकलता है, जबकि ट्रीटमेंट कैपेसिटी सिर्फ 3,500 एमएलडी की है. इससे साफ पता चलता है कि 2020 तक इसे पूरा करना बहुत चुनौती भरा काम है.

मई 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली कैबिनेट ने 5 वर्ष के नमामि गंगे प्रोजेक्ट के लिए 20 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. ईटी ने जब इस प्रोग्राम में देरी का कारण पूछा तो केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के पूर्व सचिव शशि शेखर ने कहा कि राज्यों के प्रतिरोध, खास तौर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड देरी के मुख्य कारण थे. इसके अलावा, हाल के हुए विधानसभा चुनावों के दौरान आचार संहिता की लंबी अवधि में भी निविदा प्रक्रिया में देरी हुई. इसके अलावा राज्य परियोजनाओं को अपने दम पर लागू करने पर जोर दे रहे थे.

शशिशेखर ने दिसंबर में रिटायरमेंट से पहले कई अहम प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब काम रफ्तार पकड़ेगा. उन्होंने टीओआई को बताया कि अब मुझे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में स्वीकृत परियोजनाओं में देरी का कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है. राज्य सरकारों का केंद्र से बेहतर तालमेल होगा.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY